कावेरी नदी का परिच

कावेरी नदी भारत की प्रमुख नदियों में से एक है और दक्षिण भारत की मुख्य नदी में से एक है। यह नदी दक्षिण भारत के पर्वतीय क्षेत्रों से बहकर बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है। कावेरी नदी को ‘दक्षिण काशी’ भी कहा जाता है क्योंकि यह नदी दक्षिण भारत के कई महत्वपूर्ण धार्मिक स्थलों से गुजरती है।

कावेरी नदी की उत्पत्ति: कावेरी नदी की उत्पत्ति तलाकावेरी नामक स्थल पर होती है, जो कर्नाटक राज्य के कोडगु जिले में स्थित है। यह नादि तलाकावेरी के जलस्रोत के रूप में उत्पन्न होती है और फिर दक्षिण में बहती है।

कावेरी नदी की महत्वपूर्ण गतिविधियाँ: कावेरी नदी भारत के दक्षिण भाग में एक महत्वपूर्ण नदी है, और इसकी गतिविधियाँ कई महत्वपूर्ण हैं।

  1. जल संचयन: कावेरी नदी एक महत्वपूर्ण जल संचयन स्रोत है। इसके झीलें और डैम्स को जल संचयन के उद्देश्य से उपयोग किया जाता है, जिससे कृषि और जल सप्लाई के लिए पानी उपलब्ध रहता है।
  2. प्रायोजन: कावेरी नदी का पानी जलवायु और कृषि के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह नदी कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल के कई क्षेत्रों के लिए प्रमुख जल स्रोत है और कृषि में जल की आवश्यकता होती है।
  3. पूजा और धार्मिक महत्व: कावेरी नदी के किनारे कई महत्वपूर्ण हिन्दू तीर्थ स्थल हैं, जैसे कि तलाकावेरी, रंगनाथस्वामी दिव्य क्षेत्र, श्रीरंगम, आदि। यह नदी धार्मिक महत्व के साथ जुड़ी हुई है और पूजा और स्नान के लिए महत्वपूर्ण है।

कावेरी नदी की महत्वपूर्ण झीलें: कावेरी नदी क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण झीलें हैं, जो इसके जल संचयन का हिस्सा हैं।

  1. कृष्णराजसागर: कृष्णराजसागर कर्नाटक राज्य में स्थित है और यह कावेरी नदी का एक महत्वपूर्ण डैम है। इसे जल संचयन के उद्देश्य से बनाया गया है और यह पानी का संचयन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
  2. हेमावती: हेमावती झील भी कर्नाटक में स्थित है और यह एक और महत्वपूर्ण डैम के रूप में उपयोग किया जाता है। यह झील भी पानी की आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है।
  3. कावेरी पुष्करिणी: तमिलनाडु में स्थित कावेरी पुष्करिणी भी कावेरी नदी के महत्वपूर्ण जल संचयन स्थलों में से एक है। यह झील धार्मिक और पूजा के उद्देश्य से भी महत्वपूर्ण है।

कावेरी नदी का पथ: कावेरी नदी का पथ भारत के दक्षिण में देखा जा सकता है। यह नदी तलाकावेरी से उत्पन्न होती है और फिर दक्षिण-पश्चिम की ओर बहती है।

  1. कर्नाटक: कावेरी नदी का मुख्य पाथ कर्नाटक राज्य से गुजरता है। यहाँ पर कावेरी की जलस्रोत स्थल तलाकावेरी है, जो कर्नाटक के कोडगु जिले में स्थित है।
  2. तमिलनाडु: कावेरी नदी फिर तमिलनाडु राज्य में प्रवेश करती है और यहाँ पर कई महत्वपूर्ण नगर जैसे कि त्रिच्चिनापल्ली, तिरुचिरापल्ली और तंजावुर से गुजरती है। यह राज्य के कृषि के लिए महत्वपूर्ण है और पानी की आपूर्ति के लिए ज्यादा आवश्यक होती है।
  3. केरल: कावेरी नदी का पथ फिर केरल राज्य में प्रवेश करता है, और यहाँ पर पलक्कड जिले में स्थित पदनाभरम पर्वतों को गुजरता है।
  4. बंगाल की खाड़ी: आखिरकार, कावेरी नदी बंगाल की खाड़ी में मिल जाती है, जिसका मुख दक्षिणी भारत की तट से मिलता है।

कावेरी नदी के उपयोग: कावेरी नदी का पानी कई उपयोगों के लिए उपयोगी है।

  1. कृषि: कावेरी नदी का पानी दक्षिण भारत में कृषि के लिए उपयोगी है। इसके किनारे के क्षेत्रों में चावल, कपास, तिलहन, और अन्य फसलों की खेती की जाती है।
  2. जल संचयन: कावेरी नदी के डैम्स और झीलें पानी का संचयन करने के लिए उपयोग होते हैं, जिससे किसानों को जल सप्लाई के लिए सहायक होता है।
  3. पानी की आपूर्ति: कावेरी नदी का पानी नहरों के माध्यम से अन्य क्षेत्रों में भी भेजा जाता है, जिससे जल की आपूर्ति की जाती है।
  4. पर्यटन: कावेरी नदी के किनारे कई पर्यटन स्थल हैं जो दर्शनीय होते हैं। यहाँ पर आने वाले पर्यटक नाविकरण, तीर्थ यात्रा, और अन्य गतिविधियों का आनंद लेते हैं।

कावेरी नदी की समस्याएँ: कावेरी नदी को कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

  1. जलसंकट: कावेरी नदी के किनारे के राज्यों में जल की कमी की समस्या है, और इसका परिणाम सुखा और जल संकट होता है।
  2. वनस्पति और वन्यजीव संरक्षण: कावेरी नदी के तटों के वनस्पति और वन्यजीव की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाए जा रहे हैं, ताकि प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और संरक्षण हो सके।
  3. जलवायु परिवर्तन: जलवायु परिवर्तन के कारण कावेरी नदी के पानी के स्रोतों में बदलाव हो रहा है, और यह जल संचयन की समस्या को भी प्रभावित कर रहा है।
  4. जल संचयन संरक्षण: कावेरी नदी के डैम्स और झीलों की सुरक्षा और संरक्षण की आवश्यकता है, ताकि ये जल संचयन के उद्देश्य से सफलता प्राप्त कर स

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